Daily Archives: October 31, 2005

भारतीय खाना बनाना

मेरे ख़याल में भारतीय खाना सब से स्वादिष्ट है। इसलिए अक्सर भारतीय खाना बनाता हूं। लेकिन भारतीय खाना बनाने का कार्य मुश्किल ही है और सच पूछो तो सुस्त हूं। अच्छा, अभी मैंने झूठ कहा है। वास्तव में बहुत मेहनती हूं लेकिन मेरी कार्यसूची में खाना बनाना महत्वपूर्ण नहीं। पकाने से कई दूसरे काम करने हैं मुझे (जैसा हिन्दी लिखने का अभ्यास करना)। मेरे लिए पत्नी खाना नहीं बना देती क्योंकि वह मांसाहारी है और मैं शाकाहारी हूं। (वह मेरा खाना बना सके लेकिन यह बोझ उस पर मैं नहीं डालना चाहता। यह स्थिति पारस्परिक है – आम तौर से मैं उसका खाना नहीं बनाता।)

तो ज्योती, गित्स और दूसरी कंपन्यों से मदद लेता हूं। कभी कभी मुझे भारतीय दुकान में जाना है क्योंकि कुछ ज़रूरी चीज़ें सिर्फ़ वहां बिकते हैं। तो भी पहले से अधिक भारतीय खाना आम दुकानों में भी मिलता है। अंत में आसानी से भारतीय खाना बना पाता हूं।

Halloween opposition

In the days leading up to Halloween, I’ve been hearing about and reading about people objecting to any observance of Halloween in public schools. From this article:

Bowing to concerns of a wide range of groups – from Christians who consider Halloween to have pagan or satanic overtones to church-state separatists who object to the holiday’s religious roots – some elementary schools are canceling their customary costume parades and Halloween celebrations.

Nonsense! The Christian objection here would apply just as well to Christmas. What with the tree being a pagan symbol co-opted for Christian purposes… On the other hand, the Church-State separatists should demonstrate how Halloween is religious. As far as I can remember, there is no doctrine associated with Halloween except maybe consumerism: “thou shall consume”. I think the doctrine of separation of Church and State (which is a noble fiction, but still a fiction) is important and should be enforced when there is a clear violation of the doctrine but it is not the case here.